ऑइली स्किन को स्वस्थ रखना और चिपचिपाहट से मुक्त रखना काफी कठिन हो सकता है, खासकर गर्मियों के मौसम में। तापमान बढ़ने से सीबम का उत्पादन बढ़ जाता है जिससे ड्राय और नॉर्मल स्किन वाले लोगों के चेहरे पर भी थोड़ी चिचिपाहट नज़र आने लगती है, खासकर ललाट, नाक और ठोढ़ी पर (जिसे टी-ज़ोन भी कहा जाता है)। ऑइल से छुटकारा पाना तो संभव नहीं है (और न ही ये हैल्थ के लिए अच्छा होता है क्योंकि हमारी बॉडी सीबम स्किन को चिकनाहट देकर उसे सुरक्षित रखने के लिए ही बनाती है)। लेकिन ऐसे कुछ उपाय जरूर उपलब्ध हैं जिनसे चिचिपाहट को असरदार तरीके से कंट्रोल करके स्किन को साफ और हैल्दी लुक दिया जा सकता है।

 

अपने खान-पान में थोड़ा बदलाव करें

हालाँकि इस तथ्य पर और शोध की जरूरत है कि खान-पान का सीबम पर कितना असर पड़ता है, शोध दर्शाते हैं कि कुछ खास तरह के खानों से सीबम बढ़ जाता है। इसके लिए डेरी प्रोडक्ट काफी हद तक जिम्मेदार माने जाते हैं क्योंकि इनमें पाई जाने वाली हॉरमोन्स की अधिक मात्रा से सीबम का उत्पादन 60 परसेंट तक बढ़ सकता है।

क्लीन्ज़र के सही टाइप का चुनाव करें

सभी तरह की स्किन के लिए स्किन क्लींज़िंग करना बहुत आवश्यक होता है, लेकिन ऑइली स्किन वालों के लिए, खासकर गर्मियों में तो ये बेहद जरूरी होता है। पसीना और सीबम के आधिक्य से स्किन में बैक्टीरिया उत्पन्न होने का खतरा बहुत बढ़ जाता है। स्किन की ठीक से क्लीन्ज़िंग से अधिक सीबम, पसीना, मृत स्किन कोशिकाएँ और धूल से मुक्ति मिलती है जिससे आपके रोमछिद्र बंद नहीं होते और बैक्टीरिया नहीं पनप पाते।

अपने चेहरे को रोज दो बार क्लीन्ज़ करें (सुबह और शाम)। आपको एक्सर्साइज़ करने के बाद भी अपना चेहरा क्लीन्ज़ करना चाहिए। क्लींज़िंग के लिए फेस-वाइप (चेहरे के गीले टिशू) पर भरोसा न करें क्योंकि ये ठीक से पूरी धूल और पसीने को नहीं हटा पाते और इनमें अधिकतर नुकसानदेह, ड्राय करने वाले केमिकल होते हैं। कोई कोमल, वॉटर-सॉल्यूबल (पानी में घुलनशील) क्लीन्ज़ इस्तेमाल करें और साफ पानी से धो लें। क्लीन्ज़र ऐसा होना चाहिए जो स्किन पर कोई नामो-निशान छोड़े बिना धुल कर पूरा साफ हो जाता हो।

नियमित रूप से एक्सफोलिएट करें

स्किन को नियमित रूप से एक्सफोलिएट करने से आपकी स्किन पर मृत स्किन कोशकाएँ इखट्टी नहीं हो पातीं। इन मृत कोशिकाओं से रोमछिद्र बंद होने और बैक्टीरिया पनपने का खतरा बढ़ जाता है। ऑइली स्किन में मृत कोशिकाओं को झड़ा कर दूर करने की गति वैसे भी थोड़ी धीमी होती है, इसलिए त्वचा को साफ़ रखने में एक्सफोलिएशन बहुत उपयोगी होता है।

आदर्शत: आपको एक हफ्ते में दो या तीन बार किसी ऐसे सौम्य प्रोडक्ट से एक्सफोलिएट करना चाहिए जो स्किन को नुकसान नहीं पहुंचाते हों। एक्सफोलिएशन के बाद हमेशा ऐसे प्रोडक्ट इस्तेमाल करें जिनसे स्किन मॉइश्चराइज़ होती है और जो स्किन को यूवी किरणों से बचाते हैं क्योंकि स्किन को धूप से नुकसान पहुँचने का खतरा बढ़ जाता है।

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