डॉ. शिवम् द्विवेदी, एम्.डी.

राष्ट्रीय परजीवी रोग संस्थान के अध्यक्ष. डॉ. शिवम् द्विवेदी ने मॉलिक्यूलर परजीवी विज्ञान पर ६० से ज्यादा शोध पत्र प्रकाशित करवाएं हैं.

२१ वर्षों का अनुभव.

राष्ट्रीय परजीवी रोग संस्थान ने हलिटोसिस (दुर्गंधित प्रश्वसन) के एक नए कारण को खोज निकाला है: इन्फेस्टेशन. एक हाल के शोध से यह बात सामने आयी है कि परजीवी वेस्ट उत्पाद जहरीले हैं और प्यूट्रेफैक्टिव बैक्टीरिया को पेट में जन्म देने का प्रमुख कारण बनते हैं. जिसके चलते परजीवियों से प्रभावित लोग गन्दी सांस की समस्या से परेशान रहते हैं.

आज हम लोग इस समस्या को डॉ. शिवम् द्विवेदी के समक्ष रखेंगे, जो कि राष्ट्रीय परजीवी रोग संस्थान के अध्यक्ष हैं.

— डॉ. शिवम् आने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद. आज के साक्षात्कार का प्रारंभ मैं प्रमुख मुद्दे के साथ ही करूँगा. क्या यह बात सच है कि ज्यादातर भारतीय परजीवियों से प्रभावित हैं?

हाँ, अन्य देशों की तुलना में परजीवियों से प्रभावित होने के मामलों में हम लोग कहीं आगे हैं. अत्यंत खराब पारिस्थितिक स्थिति, अधिकारियों की निष्क्रियता और लोगों के प्रति उदासीनता के कारण यह स्थिति सामने आ खड़ी हुई है.

— डॉ. शिवम् क्या मुंह की बदबू और शरीर में परजीवियों की उपस्थिति संबंध में जो शोध हुआ है उसमे कोई सच्चाई है?

कुछ वर्ष पहले, यहाँ तक कि चिकित्सकीय समुदाय के लोग भी इस बात को मानते थे कि मुंह की बदबू का कारण ओरल कैविटी में ही जन्म लेता है. हांलाकि हाल के शोध से यह बात सामने आयी है कि पेट और लीवर की समस्या (जो कि परजीवियों की उपस्थिति में सदैव होती ही है) भी मुंह की बदबू के लिए जिम्मेदार होते हैं. डॉक्टर्स ने इस बात की भी सलाह दी है कि थोड़े से “सामान्य लक्षण” को भी हलके में नहीं लेना चाहिए. परजीवियों की उपस्थिति शरीर में रोगों की भरमार ला देती है.

हमारे शोध संस्थान में हुए इस शोध के परिणाम को मैं व्यक्तिगत तौर पर एकदम सही मानता हूँ. सामान्य “मुंह की बदबू की समस्या” बहुत ही दुष्कर बीमारी बन जाती है. लगभग ९२% मौतें परजीवियों द्वारा जनित संक्रमण के चलते होती हैं. और ये कोई रोग से होने वाली मौतें नहीं हैं.

जब भी हम परजीवियों के बारे में चर्चा करते हैं तो हमारा तात्पर्य सामान्य वॉर्म्स से ही होता है. क्या वे सच में गन्दी सांस और यहाँ तक की मौत के लिए भी जिम्मेदार हो सकते हैं?

तथ्यों के स्तर पर बात करें तो परजीवियों को सामान्य वॉर्म समझना बहुत बड़ी भूल है. परजीवियों के अलग-अलग प्रकारों की एक बहुत बड़ी मात्रा शरीर के विभिन्न अंगों में रहती है और वे विभिन्न कारणों के जनक होते हैं. और वैसे वॉर्म्स के बारे में सटीकता से बात करें तो, हेलमिन्थस – बहुत ही ज्यादा खतरनाक होते हैं. ये आंत को बुरी तरह से प्रभावित करते हैं, जिसके चलते आंत सड़ने लगती है और अंततः नष्ट हो जाती है. यहाँ तक कि वॉर्म्स को खोज के नष्ट कर पाना बहुत ही दुष्कर कार्य होता है.

इसके साथ, हजारों ऐसे परजीवी हैं जो कि आपके जिगर, मस्तिष्क, फेफड़े, रक्त और पेट में रह सकते हैं, और उनमें से लगभग सभी घातक हैं. उनमें से कुछ तुरंत आक्रामक तरीके से कार्य करना शुरू कर देते हैं और शरीर को नष्ट करना आरम्भ कर देते हैं. अन्य कई परजीवी लम्बे समय तक निष्क्रिय बने रहते हैं जब तक कि उनकी संख्या इतनी बड़ी नहीं हो जाती कि इंसान का शरीर उनके वार को सहन करने के काबिल नहीं बचता है, जिसके चलते व्यक्ति मर जाता है.

इसी समय मैं आत्मविश्वास से यह बात कह सकता हूँ कि व्यावहारिक रूप से हर कोई परजीवियों से संक्रमित है. बात यह है कि उनमें से अधिकतर का पता लगा पाना बेहद मुश्किल है. और जब उन परजीवियों के संक्रमण से हुए असर नज़र आते हैं, तब ही डॉक्टर उन्हें समाप्त करने की कोशिश करते हैं. यहाँ तक के शरीर के ऑटोप्सी के दौरान भी परजीवियों का पता लगाने के लिए विशेष परीक्षणों की आवश्यकता होती है. कम से कम उनमें से ज्यादातर के लिए तो ऐसा होता ही है.

ऐसे हजारों परजीवी हैं जो कि आपके जिगर, मस्तिष्क, फेफड़े, रक्त, पेट में रह सकते हैं; और उनमें से लगभग सभी घातक हैं और यह आम तौर इन सब की शुरुआत खराब सांस से ही शुरू होती है.

— क्या आप इन्फेसटेशन का कोई विशिष्ट उदहारण दे सकते हैं?

मैं आपको इससे सम्बंधित हजारों उदाहरणों के बारे में बता सकता हूँ. लेकिन मैं केवल ख़ास उदाहरणों पर ही चर्चा करूँगा जो कि परजीवियों के खतरे से संबधित हैं.

सबसे पहले जैसा कि पता चला कि कुछ टैपवार्म कैंसर का भी कारण बन सकते हैं. इसके अलावा पहले तो स्वयं कीड़े ही इससे प्रभावित होते हैं परन्तु बाद में उनकी घातक कोशिकाओं से यह पूरे मानव शरीर में भी फ़ैल जाते हैं, और मानव शरीर को संक्रमित कर देते हैं. ऐसा तब होता है जब कि वॉर्म्स का लार्वा आंतों से मानव के लिम्फ नोड्स में मिल जाता है. नतीजतन, वे कैंसरकारक ट्यूमर में परिवर्तित हो जाते हैं और इंसानों के शरीर को विषाक्त कर देते हैं. और कुछ महीनो में मौत हो जाती है. इस तरह के ट्यूमर से मृत्यु का एक और मामला पिछले हफ्ते ही नज़र आया था.

इस तस्वीर में: एक घातक ट्यूमर की कोशिकाओं को दिखाया गया गया है, जो कि परजीवी कीड़े के माध्यम से फैला है.

एक अन्य आम मामला मानव मस्तिष्क के इन्फेस्टेशन का है. इससे न्यूरॉसेस, तेज़ थकान, अत्यधिक चिड़चिड़ापन और अचानक मूड स्विंग होने लगता है, और रोग के आगे के चरणों में, जैसे-जैसे मस्तिष्क में परजीवी भरने लगते हैं वैसे-वैसे और अधिक गंभीर बीमारियां विकसित होती हैं, जो कि अंततः मौत का कारण बनकर उभरता है.

हमारे पास ऑटोप्सीज़ का एक फोटो संग्रह है, जहां परजीवी शरीर के विभिन्न अंगों में दर्शाए गए हैं. उनमे से यहाँ मैं कुछ तस्वीरें दिखा रहा हूँ, लेकिन मै आपको पहले ही चेतावनी दे दूँ कि वे देखने में बहुत ही भयानक हैं.

मानव पिंड में कीड़े

मानव मस्तिष्क में परजीवी जो कि कैंसर का कारण बने

दिल में कीड़े जो कि कार्डियक अरेस्ट का कारण बने

तीसरा उदाहरण मानव हृदय में इन्फेस्टेशन का है. यह माना जाता है कि यह रोग बहुत ही दुर्लभ है. लेकिन वास्तव में, लगभग २३% लोग हार्टवर्म से प्रभावित होते हैं. जो कि हर चौथे व्यक्ति को इससे प्रभावित बना देता है. प्रारंभिक अवस्था में, वे पूरी तरह से अदृश्य होते हैं, और उनका शरीर पर शून्य प्रभाव पड़ता है. लेकिन समय बीतने के साथ-साथ मानव हृदय में कीड़ों की संख्या बढ़ने लगती है. ये कई प्रमुख हृदय रोगों के होने का मूल कारण हैं, और अगर हम कार्डियक अरेस्ट के कारण अचानक होने वाली मौतों के बारे में चर्चा करें तो, ये परजीवी ही १००% मामलों में जिम्मेदार होते हैं.

— क्या इन्फेस्टेशन के इसके अलावा भी कोई खतरनाक प्रभाव हैं?

पुरुषों में, परजीवी प्रोस्टेट ग्लैंड में सूज़न, नपुंसकता, एडेनोमा, सिस्टिटिस, पथरी का कारण बनकर उभरते हैं.

महिलाओं में, ये परजीवी अंडाशय, फाइब्रॉएड, गर्भाशय फाइब्रॉएड, फाइब्रोसिस्टिक स्तन रोग, साथ ही अधिवृक्क ग्रंथि, मूत्राशय और गुर्दा आदि में दर्द और सूजन का कारण बनते हैं. और निश्चित रूप से ही इन समस्याओं के चलते त्वचा की उम्र तेज़ी से बढ़ती है; झुर्रियाँ, आंखों के नीचे निशान भी आ जाते हैं. साथ ही पूरे चेहरे, शरीर पर मस्से और पैपिलोमास आदि भी आ जाते हैं.

Detoxic मीनिंग इन हिंदी

— अपने आप को परजीवियों से कैसे बचाएं? क्या इसके लिए कोई परीक्षण या दवाएं उपलब्ध हैं?

दुर्भाग्यवश, यह कहा जा सकता है कि मनुष्यों के अंदर परजीवियों को ढूंढ पाने का कोई भी निश्चित विकल्प उपलब्ध नहीं हैं. आंशिक रूप से, यह परजीवियों के विभिन्न प्रकार (२,००० से भी ज्यादा परजीवियों की प्रजातियां अभी तक ज्ञात हैं) होने के कारण होता है, और आंशिक रूप से उनकी पहचान कर पाना बहुत ही कठिन, उच्च स्तर का कार्य होता है. भारत जैसी कुछ एक जगहों पर ही पूर्णतया परजीवियों की शरीर में पहचान की जा सकती है जिसमे बहुत ज्यादा खर्चा आता है.

परजीवियों से प्रभावित होने के निम्नलिखित लक्षण हैं:

  • गन्दी सांस
  • एलर्जी (रैशेस, पानी भरी आँखें, जुकाम);
  • रैशेस और त्वचा पर लालिमा;
  • अक्सर सर्दी से प्रभावित होना, गले में खराश, नाक बंद;
  • हमेशा थकान रहना (आप जल्दी थक जाते हैं, इसके लिए आप चाहें जो भी कई न कर लें थकान पर कोई भी फर्क नहीं पड़ता );
  • अक्सर सिरदर्द का रहना
  • कब्ज या दस्त;
  • जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द;
  • घबराहट, अनिद्रा और भूख से संबधित रोग;
  • डार्क सर्किल, आँखों के नीचे निशान आदि.

अगर इनमे से कोई भी लक्षण आपके शरीर में दिखायी पड़ता तो इस बात को ९९% विश्वास के साथ कहा जा सकता है कि आपके शरीर में परजीवी विद्यमान हैं और आपको उनसे जल्द से जल्द मुक्ति पा लेनी चाहिए!

अगर दवाओं के विषय में चर्चा करें तो इसमें कुछ समस्याएं हैं. आज की तारीख तक केवल एक ही ऐसा इलाज़ उपलब्ध है जो कि परजीवियों से मुक्ति प्रदान करा सकता है.

इस परजीवीनाशक दवा को Detoxic कहते हैं. इसे वैज्ञानिकों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम के सहयोग से परजीवी विज्ञान संस्थान के मेरे सहयोगियों द्वारा विकसित किया गया था. लगभग दो दर्जन विभिन्न परजीवीविरोधी दवाओं का ध्यानपूर्वक अध्ययन किया गया, लेकिन शोध प्रक्रिया के दौरान, यह स्पष्ट हो गया कि केवल Detoxic ही एकमात्र प्रभावी दवा है.

Detoxic में मिलफॉयल (एकीलिए मिल्लेफॉली), सेंटॉरी (सेंटॉरी एरिथ्रेया) और लौंग का विशेष मिश्रण विद्यमान होता है. इसके विकास और परीक्षण के दौरान यह दवा बेहद प्रभावी साबित हुई. आज, यह एकमात्र ऐसी औषधि है जो इस क्षेत्र में ख़ास परिणाम प्रदान करती है. और अगर आप सिर्फ पैसे के बारे में सोच रहे हैं, तो इसका उत्पादन केवल निर्यात के लिए भी हो सकता था क्योंकि दुनिया भर के लोग इसके लिए कोई भी कीमत चुकाने के लिए तैयार हैं. Detoxic

जो लोग इसे आज़मा चुके हैं उन्होंने इसके बारे में बहुत सारी सकारात्मक समीक्षाएं लिखी हैं.

Detoxic मूल्य

— ऐसा क्या है जो Detoxic को इतना ख़ास बनाता है? इसमें और अन्य परजीवी विरोधी औषधियों में क्या अंतर है?

जैसा कि मैं पहले ही बता चुका हूँ, आज की तारीख तक, यह पूरी दुनिया में एकमात्र परिणाम प्रदान करने वाली परजीवी विरोधी औषधि है. यह पूरी तरह परजीवियों से छुटकारा पाने में मदद करती है. यही कारण है कि इसे अंतरराष्ट्रीय फार्मेसी चेन और फार्मास्युटिकल कंपनियों के द्वारा मांगा जा रहा है. अन्य परजीवी विरोधी दवाओं की तुलना में, यह सीधे उन सभी परजीवियों की सभी प्रजातियों के खिलाफ कार्य करती है जो कि मानव शरीर को संक्रमित कर सकते हैं. इसकी पहचान की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए, यह आपके संपूर्ण शरीर को भलीभांति शुद्ध करने का कार्य करती है. मैंने पहले ही कहा था कि यह पता लगाना लगभग असंभव है कि किस प्रकार के परजीवी ने शरीर को संक्रमित किया है और Detoxic शरीर में कहीं भी रहने वाले किसी भी परजीवी को नष्ट कर सकती है – मस्तिष्क, हृदय से लेकर जिगर और आंतों तक. आज की तारीख़ में कोई भी अन्य औषधि ऐसा नहीं कर सकती है.

इसके अलावा, यह कोई रासायनिक दवा नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह से एक प्राकृतिक उत्पाद है, जो कि एलर्जी की प्रतिक्रियाओं, आंत्र फ्लोरा असंतुलन और अन्य समस्याएं समाप्त कर देता है जो कि पारम्परिक गोलियों के साथ परजीवियों का इलाज़ करते हुए पैदा हो सकती हैं और कई रासायनिक घटकों से शरीर को निपटने के लिए बाध्य कर देती हैं.

यह Detoxic पर किये गए विभिन्न लैब परीक्षणों के आधिकारिक परिणाम हैं.

१. Detoxic की प्रभावकारिता गणना को मानक तकनीक का उपयोग करके (१०० लोगों के एक समूह में मरीजों की कुल संख्या के साथ सही हो गए मरीज़ों की संख्या का अनुपात जिन्होंने उस दवा सेवन किया) किया गया है:

  • हेलमन्थ्स और उनके अण्डों को जड़ से ख़त्म करती है: १००%
  • अग्न्याशय की स्थिति का समान्यीकरण: ८०%.
  • एलर्जिक जिल्द की सूजन का उन्मूलन: ९०%
  • गैस्ट्रेटिस, अल्सर, एवं दस्त की समस्या का उन्मूलन: ९०%.
  • एनीमिया का उन्मूलन: १००%
  • गन्दी सांस का उन्मूलन: १००%

२. कोई नकारात्मक असर नहीं, और न ही कोई भी एलर्जिक प्रतिक्रियाएं देखने को मिली.

३. Detoxic को मानव शरीर में बसे हुए परजीवियों के इलाज़ के लिए सबसे कारगर, अग्रणी औषधि के रूप में स्वीकारा जा चुका है.

— मुझे लगता है कि हमारे दर्शक इस बात को जानने के इच्छुक होंगे कि Detoxic को कहाँ से ख़रीद सकते हैं?

– आप इसे इसके निर्माताओं की आधिकारिक वेबसाइट से मंगवा सकते हैं. दुर्भाग्य से, फार्मेसियां बहुत अधिक खुदरा फ़ायदा पाना चाहती हैं. वे मूल रूप से बहुत अधिक कीमत पर बेचना चाहते हैं और वहीँ जिन वैज्ञानिकों ने इसे बनाए हैं, वे इस दृष्टिकोण के एकदम खिलाफ हैं. एक डॉक्टर के रूप में, मैं चाहता हूं कि पूरे देश में सभी लोग इस उत्पाद का उपयोग कर सकें.

मुझे उम्मीद है कि समय के साथ हम सभी एक समझौते पर पहुंच पाएंगे और देश की हर फार्मेसी में Detoxic बेची जाएगी. इस बीच, इसे केवल ऑनलाइन ख़रीदा जा सकता है. खरीदने की प्रक्रिया में सब कुछ बहुत ही सुविधाजनक और आसान है – इस उत्पाद को मेल द्वारा या कूरियर द्वारा डिलीवर किया जा सकता है, और डिलीवरी पर ही नगद भुगतान करने की सुविधा भी उपलब्ध है. इस उत्पाद को प्राप्त करने के लिए और कुछ भी आवश्यक नहीं है. वर्तमान समय में इस औषधि को ५०% छूट पर एक ख़ास ऑफर के चलते प्रदान किया जा रहा है इसलिए आपको इसका प्रयोग अवश्य करना चाहिए.

डॉ. शिवम्, इससे पहले कि हम अपने साक्षात्कार को समाप्त करें, क्या आप हमारे पाठकों से कुछ कहना चाहेंगे?

मैं केवल एक बात कहना चाहता हूं कि, आप सभी लोग अपने स्वास्थ्य की देखभाल करें. हो सकता है कि आपको इसमें बिलकुल भी संदेह न हो, लेकिन आपके शरीर में परजीवियों के होने की सम्भावना ९७-९८% तक है. वे कहीं भी हो सकते हैं – रक्त, आंतों, फेफड़े, हृदय, मस्तिष्क में. परजीवी वास्तविकता में आपको अंदर से खा रहे हैं वहीँ साथ ही में आपके शरीर को जहरीला बना रहे हैं. नतीजतन, आपको कई स्वास्थ्य समस्याएं घेर लेती हैं जो कि आपके जीवनकाल से १५ से २५ वर्षों तक को कम कर सकती हैं. मैं अचानक होने वाली मौतों की समस्या का उल्लेख भी नहीं कर रहा हूं, जो कि आम तौर पर मानव शरीर पर परजीवियों के प्रभाव से ही जुड़ा होता है.

Detoxic® को आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से मंगवाया जा सकता है.

Detoxic कीमत:

Detoxic १९४ टिप्पणियां

शिवांगी

मैंने इस औषधि को मंगवाया. मैं गन्दी सांस के बारे में बहुत परेशान थी. इसके प्रयोग के पांचवे दिन ही मुझे ये बात महसूस हुई कि मेरी सांस पहले से बहुत ही सही हो गयी थी. इसके साथ ही मेरा पेट अब सही से काम करने लगा था. इस रोग को वापस आने से रोकने के लिए मैं हर ३ महीने में इसका कोर्स करती रहती हूँ.

स्मिता सिंह

मैंने Detoxic मंगवाया, यह मुझे कूरियर के माध्यम से अगले दिन प्राप्त हुआ. उसके बाद मैंने इसका प्रयोग प्रारंभ कर दिया और उसके बाद तो न जाने क्या-क्या मेरे शरीर से बाहर निकला… मुझे ऐसा कभी नहीं लगा था कि मेरे शरीर के अन्दर ऐसे जीव रह रहे होंगे. मैं तो अब यही सोच रही हूँ कि मैं अब तक कैसे जिन्दा बनी रही.

तृषा

लेख के लिए धन्यवाद! मैंने इसे अपने लिए भी मंगा लिया है.

आकाश

जब मैंने Detoxic का प्रयोग करना प्रारंभ किया तो मुझे इस बात का जरा भी अन्दाज़ा नहीं था कि यह किस तरह का असर करेगा. पेट की पीड़ाएं चली गई हैं (लगता है कि पेट में कुछ था), श्वास की कमी और मुंह की गंध भी चली गई थी. ५३ साल की उम्र में, मुझे ३० साल की उम्र जैसा लगने लगा है आप इस तरह की बातें एक सामान्य चिकित्सक से कभी नहीं सुनेंगे.

अंकिता

मैंने भी Detoxic का प्रयोग किया और इसका असर बेहद ख़ास है. अब मैं अपने आप को स्वस्थ और जवां पाती हूँ. मेरी प्रतिरक्षा प्रणाली बहुत सही हो गयी है, लगभग ८ महीने व्यतीत हो चुके हैं जब से मैंने अपना उपचार शुरू किया है. मैं तब से बिलकुल भी बीमार नहीं पड़ी! ऐसे परिणामों के बारे में तो कभी मैं केवल सपने ही देख सकती थी. मैं प्रत्येक व्यक्ति को इसके प्रयोग की सलाह देती हूँ.

आराधना

मैंने हाल ही में परजीवियों के ऊपर बीबीसी की एक डॉक्यूमेंट्री देखी जिसमे इस औषधि के बारे में भी चर्चा की गयी थी. उन्होंने उसमे बताया था कि यह दुनिया में आज के समय में उपलब्ध दवाओं में सबसे बेहतर परजीवी विरोधी औषधि है.

अनुराग

मैंने भी इसे ऑर्डर किया है.

रितेश सिंह

मुझे पहले आधे सर में दर्द रहता था. उसके बाद मैंने Detoxic का कुछ सप्ताह के लिए सेवन किया और तबसे मेरा सर दर्द हमेशा के लिए गया हो गया है… अब तो मैं इसी बात को सोचता रहता हूँ कि ऐसा क्या था मेरे सर में?

सारिका

मुझे मेरी दादी ने सिखाया था कि किस प्रकार से वॉर्मवूड के प्रयोग से परजीवियों से छुटकारा पाया जा सकता है. मेरा पूरा परिवार परजीवियों से मुक्ति पाने के लिए वॉर्मवूड से बने पेय को पीता थे, जिससे मेरे बच्चे कीड़ों से बचे रहे; परन्तु मैं चाहे जो कुछ भी कर लूँ, मेरी बुरी सांस नहीं जा रही थी. मैंने भी Detoxic ऑर्डर कर दिया, और इसके प्रयोग के बाद अब मुझे सांस की कोई भी समस्या नहीं रह गयी है. और हाँ, मैंने कडवे वॉर्मवूड से बने पेय को पीना छोड़कर Detoxic का सेवन ही प्रारंभ कर दिया है. इसका असर वैसा ही है, कीमत भी सही है और इसका प्रयोग भी बहुत आसान है.

अंजली वर्मा

बहुत ख़ास साक्षात्कार, शुक्रिया! आपकी इस राय ने लोगों की आँखें खोल दी हैं!

रेखा

ये एक स्कैम भी तो हो सकता है न? नहीं तो इसे केवल इन्टरनेट पर ही क्यों बेचा जा रहा है?

ललित

मैं सभी टिप्पणियों के साथ सहमत हूँ. जब मैंने इसका प्रयोग प्रारंभ किया तो मेरे शरीर से बहुत भयंकर कीड़े निकले. मैं डर कर डॉक्टर को दिखाने ले गया. उन्होंने उन कीड़ों को देखा और मुझे बताया कि ये सारे लीवर के कीड़े हैं. और अगर मैंने Detoxic का सेवन न किया होता तो २ से ३ वर्ष के समय में मेरी मृत्यु भी हो सकती थी.

मोहित

रेखा, क्या तुमने सही से लेख पढ़ा भी है? तुम किस स्कैम की बात कर रही हो जबकि आपको उत्पाद की प्राप्ति पर ही भुगतान करना है? मैंने इसको मंगवाया और मुझे यह कूरियर के माध्यम से प्राप्त हुआ. मैंने अच्छे से हर चीज़ की जांच की और उसके बाद ही मैंने इसका भुगतान किया. आज के समय में तो हर चीज़ इन्टरनेट पर ही प्रदान की जा रही है क्या कपड़े, क्या जूते, क्या कोई ख़ास वैज्ञानिक उपकरण या फ़िर क्या फर्नीचर.

सपना मिश्रा

शानदार उत्पाद. मैं और मेरे पति दोनों ही इसका सेवन करते हैं, हम दोनों ही ने अपने स्वास्थ्य में अच्छा खासा परिवर्तन महसूस किया है. अब हम अपने आप को पहले से ज्यादा जवां महसूस करते हैं और अब पहले से कहीं ज्यादा शक्ति भी रहती है. जब आपको परजीवियों से मुक्ति प्राप्त हो जाती है तब आपको बहुत ही अच्छा अहसास होता है.

अर्पिता

मैंने अभी टिप्पणियां पढ़ी और पढने के बाद मैंने भी मन बना लिया है 🙂 और अब मैं भी इसे ऑर्डर कर रही हूँ.

नेहा

आपको इस बात पर भरोसा नहीं होगा. मुझे हमेशा थके रहने की समस्या बनी रहती थी, जिंदगी में कोई भी दिलचस्पी नहीं रह गयी थी, मैं तो एकदम हताश हो गयी थी. और उसके बाद मैंने इस अद्भुत औषधि Detoxic को ख़रीदा, मैं हर किसी को इसे आज़माने की सलाह देती हूँ.

सर्वेश

सलाह के लिए धन्यवाद. अब समय आ चुका है कि मैं अपने शरीर को साफ़ करूँ. कम से कम ज़िन्दगी में एक बार तो इससे सफाई करनी ही चाहिए. मैंने इससे पहले कभी भी इसका प्रयोग नहीं किया है परन्तु मुझे ऐसा लगता है कि इसके प्रयोग के बाद मेरी जिंदगी परजीवियों के बिना बहुत ही बेहतर होगी 🙂 मुझे इस बात का पूरा भरोसा है कि मेरे शरीर में परजीवियों का वास है, क्योंकि आज के समय में शरीर में परजीवियों का होना बहुत ही आम बात है.

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